सोशल मीडिया और सिविल सेवक (Social Media and Civil Servants)
मोटे तौर पर, सोशल मीडिया को किसी वेब या
मोबाइल आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह किसी व्यक्ति
या एजेंसी को अंतःक्रियात्मक रूप से संवाद करने और कंटेट का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाता है। सोशल मीडिया के उदाहरण हैं- फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम
आदि।
कौन-सी विशेषताएं सोशल मीडिया को अलग
बनाती हैं ?
- संबद्धता: इसमें समान विचार वाले लोगों को जोड़ने और यदि लोगों के बीच संपर्क टूट गया हो तो उन्हें फिर से आपसी संपर्क में लाने की क्षमता निहित है।
- सहयोगः सोशल मीडिया द्वारा इस प्रकार निर्मित संपर्क लोगों को मिलकर काम करने में सक्षम बनाते हैं।
- समुदाय: संबद्धता और सहयोग, समुदायों का निर्माण करने और उन्हें बनाए रखने में मदद करते हैं ।
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली, 1968 में क्या प्राविधान हैं?
इसमें कहा गया है, कि किसी भी सेवारत सिविल सेवक को
सार्वजनिक मीडिया पर ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जो -
- केंद्र सरकार या राज्य सरकार की किसी वर्तमान या हालिया नीति या कार्रवाई की नकारात्मक आलोचना करता हो।
- केंद्र सरकार और किसी राज्य सरकार के संबंधों में कठिनाइयां पैदा करता हो।
- केंद्र सरकार और किसी विदेशी सरकार के बीच संबंधों में कठिनाइयां पैदा करता हो।
सोशल मीडिया के आगमन से सूचना को साझा
करने और उसके प्रसार का तरीका बदल रहा है। सिविल सेवक आमतौर पर इसका उपयोग निम्नलिखित
तरीकों से करते रहे हैं:
- नागरिकों से जुड़ने के लिए: सिविल सेवक नागरिकों के साथ व्यक्तिगत संपर्क बनाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इससे जनभागीदारी बढ़ सकती है, विश्वास उत्पन्न हो सकता है और संबंधित सिविल सेवक की लोकप्रियता भी बढ़ सकती है।
- जानकारी साझा करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए: सिविल सेवकों सहित विभिन्न लोक प्राधिकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सरकारी योजनाओं के विवरण, अद्यतन नीति संबंधी जानकारी, नियमों आदि को साझा करते हैं। उदाहरण के लिए-दिल्ली यातायात पुलिस मीम्स (Memes) के जरिए यातायात नियमों एवं कानूनों के बारे में जागरूकता पैदा कर रही है।
- जनता के दृष्टिकोण को समझने के लिए: सोशल मीडिया लोकमत के डेटाबेस के रूप में काम करता है। कई बार सिविल सेवक नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में लोगों का फीडबैक जानने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं में जातिवाद, सांप्रदायिकता और लिंग के आधार पर व्याप्त भेदभाव (Sexism) जैसे विभिन्न मुद्दे उभर कर सामने आते हैं।
- व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए: आधिकारिक क्षमता से इतर, सिविल सेवक व्यक्तिगत स्तर पर इसका इस्तेमाल अपने निजी विचार रखने और अन्य कंटेंट साझा करने के लिए भी करते हैं।
सिविल सेवकों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल ने मीडिया के क्षेत्र में उनकी एक अलग भूमिका का सृजन किया है। यह नई भूमिका नौकरशाह के रूप में उनकी भूमिका से अलग है। इसके लाभों और हानियों को निम्नलिखित विवरण के रूप में देखा जा सकता है –
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सिविल
सेवकों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग करने से लाभ |
सिविल
सेवकों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग करने से हानि |
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सिविल सेवकों द्वारा सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जा सकता है?
सोशल मीडिया पर सिविल सेवकों की
उपस्थिति एवं उनकी भागीदारी के सबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
द्वारा कुछ बुनियादी मूल्य प्रस्तुत किए गए हैं, जो निम्नलिखित
हैं:
- पहचान (Identity): हमेशा यह ध्यान में रखें कि आप कौन है, विभाग में आपकी क्या भूमिका है और हमेशा मैं/मेरा जैसे सर्वानामों का प्रयोग करते हुए पोस्ट करें। आवश्यकता पड़ने पर डिस्क्लेमर का प्रयोग कर सकते हैं।
- प्राधिकार (Authority): जब तक आपको अधिकार न दिया जाए तब तक कोई टिप्पणी और प्रतिक्रिया न दें, विशेष रूप से उन मामलों में जो विचाराधीन (Sub-judice) है, या जो अभी ड्राफ्ट में हैं या अन्य व्यक्तियों से संबंधित है।
- प्रासंगिकता (Relevance): अपने क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर ही टिप्पणी करें तथा प्रासंगिक एवं उचित टिप्पणी करें। इससे संवाद अधिक सार्थक होगा और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
- पेशेवर व्यवहार (Professionalism): पोस्ट करते समय विनम्र, विवेकशील बनें और सभी का सम्मान करें। किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के पक्ष में या उसके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी न करें। साथ ही, पेशेवर चर्चाओं के राजनीतिकरण से बचें।
- खुलापन (Openness): सभी प्रकार के विचारों या आलोचनाओं को सुनने के लिए तैयार रहें, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक। यह आवश्यक नहीं है कि आप प्रत्येक टिप्पणी का उत्तर दें।
- अनुपालन (Compliance): प्रासंगिक नियमों और विनियमों का अनुपालन करें। बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) एवं दूसरों के कॉपीराइट का अतिक्रमण या अवहेलना न करें।
- निजता (Privacy): जब तक दूसरों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए सार्वजनिक करना आवश्यक न हो तब तक अन्य व्यक्तियों की व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और न ही अपनी निजी एवं व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।
निष्कर्ष: सोशल मीडिया का उपयोग करते
समय भी कहीं न कहीं सिविल सेवक सरकार का ही प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं। इस
संदर्भ में, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता एवं अन्य सिविल सेवा
मूल्यों को बनाए रखेंगे एवं उन्हें प्रदर्शित भी करेगे। इसलिए किसी भी सिविल सेवक
द्वारा किया गया प्रत्येक पोस्ट संदर्भ के अनुसार प्रासंगिक एवं सुसंगत होना
चाहिए। साथ ही, प्रत्येक पोस्ट लोक सेवा के नीतिशास्त्रीय सिद्धांतों के अनुरूप भी होना
चाहिए।
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